जन्म मृत्यु पंजीकरण संशोधन अधिनियम 2026: नए नियम लागू

Sep 28, 2026
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राजस्थान सरकार के सांख्यिकी विभाग ने जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2026 के संबंध में एक महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किया है। केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय (महारजिस्ट्रार कार्यालय) की अधिसूचना के क्रम में यह नया संशोधित कानून पूरे प्रदेश में 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी हो गया है। यदि आप ई-मित्र केंद्र संचालित करते हैं या राजस्थान में अपने किसी परिजन का जन्म या मृत्यु प्रमाणपत्र बनवा रहे हैं, तो इस नए संशोधन (विशेषकर विलंबित पंजीकरण) के नियमों को समझना बेहद आवश्यक है।

क्या है जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2026?

भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय द्वारा जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2026 (No. 12 of 2026) की अधिसूचना जारी की गई थी। इसके तहत जन्म और मृत्यु अधिनियम की धारा 13(3) में बदलाव किया गया है तथा धारा 13(3A) को जोड़ा गया है। इन नए बदलावों का मुख्य उद्देश्य विलंबित (Delayed) जन्म या मृत्यु की सूचना दर्ज करने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सख्त और प्रामाणिक बनाना है।

1 अक्टूबर 2026 से लागू हुए नए नियम (धारा 13 की संशोधित व्यवस्था)

विभाग के आदेशानुसार अब 1 वर्ष से अधिक समय बीत जाने पर पंजीकरण कराने के नियम दो श्रेणियों में बांट दिए गए हैं:

1. 1 वर्ष से अधिक तथा 2 वर्ष के भीतर सूचना देने पर (धारा 13(3))

यदि किसी जन्म या मृत्यु की घटना घटित होने के 1 वर्ष के पश्चात लेकिन 2 वर्ष के भीतर रजिस्टरार को सूचना दी जाती है, तो इसका पंजीकरण:

  • जिला मजिस्ट्रेट (DM),
  • उप-खंड मजिस्ट्रेट (SDM), या
  • जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट (Executive Magistrate)

के आदेश पर ही किया जाएगा। इसके लिए आवेदक को निर्धारित फीस देनी होगी तथा घटना की सत्यता का सत्यापन कराना अनिवार्य होगा।

ध्यान दें: कार्यपालक मजिस्ट्रेट का तात्पर्य भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 14(1) के तहत नियुक्त मजिस्ट्रेट से है।

2. 2 वर्ष से अधिक समय बीत जाने पर (धारा 13(3A))

यदि जन्म या मृत्यु की घटना घटित हुए 2 वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, तो इसका पंजीकरण:

  • केवल प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate First Class - JMFC)

 

के आदेश के पश्चात ही किया जाएगा। संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट घटना की सत्यता और शुद्धता की जांच/सत्यापन करेंगे और निर्धारित शुल्क जमा कराने के बाद ही पंजीकरण का आदेश देंगे।

अधिकारियों एवं रजिस्ट्रारों के लिए निर्देश

राजस्थान सांख्यिकी विभाग के आदेश क्रमांक एफ / 13 / 1 / 3 / आर.जी.आई. / बीसीएस / डीईएस / 2017 / 783 दिनांक 24/09/2026 के अनुसार, राज्य के सभी:

  • उपखंड अधिकारी (SDM)
  • कार्यपालक मजिस्ट्रेट एवं तहसीलदार
  • नगर निगम / नगर परिषद / नगर पालिका के रजिस्ट्रार
  • ग्राम पंचायत के रजिस्ट्रार (विकास अधिकारी/ग्राम विकास अधिकारी)

को निर्देश जारी किए गए हैं कि वे 1 अक्टूबर 2026 के बाद केवल इन्हीं संशोधित कानूनी प्रावधानों का अनिवार्य रूप से पालन सुनिश्चित करें।
 

Official Order

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आमजन एवं ई-मित्र धारकों के लिए मुख्य बातें

  1. समय पर पंजीकरण कराएं: जन्म या मृत्यु की घटना का पंजीकरण 21 दिनों के भीतर या यथाशीघ्र कराने का प्रयास करें ताकि मजिस्ट्रेट के आदेश और लंबी अदालती/प्रशासनिक प्रक्रिया से बचा जा सके।
  2. 2 साल से पुराने मामलों में कोर्ट का आदेश आवश्यक: यदि प्रमाणपत्र 2 साल से अधिक पुराना है, तो अब केवल SDM स्तर से काम नहीं चलेगा, इसके लिए प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश (JMFC Order) प्रस्तुत करना होगा।
  3. पोर्टल अपडेट: ई-मित्र पोर्टल और पहचान पोर्टल पर भी इन संशोधनों के अनुसार नए विकल्प उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
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